Summer Farming: à¤à¤¾à¤°à¤¤ के कई राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में मारà¥à¤š महीने में à¤à¤‚टà¥à¤°à¥€ के साथ ही गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के मौसम ने à¤à¥€ दसà¥à¤¤à¤• दे दी है। चिलचिलाती धूप à¤à¤µà¤‚ सूरà¥à¤¯ के दहकते अंगारे हमारी धरती के जीवन-चरà¥à¤¯à¤¾ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ रखती है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में सामानà¥à¤¯à¤¤à¤ƒ बहà¥à¤¤ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गरà¥à¤®à¥€ पड़ती है, विशेषकर इस वरà¥à¤· तो मौसम विà¤à¤¾à¤— का à¤à¥€ अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ है कि इस बार तपाने वाली गरà¥à¤®à¥€ पड़ने वाली है। सूरà¥à¤¯ की किरणें à¤à¤µà¤‚ तापमान जितना गरà¥à¤®à¥€ के मौसम में हमारे लिठपरेशानी का सबब बन जाती है, उतना ही हमारे लिठये लाà¤à¤•ारी à¤à¥€ होती है। इस गरà¥à¤®à¥€ के मौसम को किसान या à¤à¤¸à¥‡ लोग जो घरों में बागवानी करना पसंद करते हैं कैसे अपने लिठलाà¤à¤•ारी बनाà¤à¤‚, इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में हम उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ पर चरà¥à¤šà¤¾ करने वाले हैं।
मानव जाति की रोटी, कपडा और मकान की तीन मूलà¤à¥‚त आवशà¥à¤¯à¤•ताओं में रोटी यानी à¤à¥‹à¤œà¤¨ का सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ महतà¥à¤µ है और à¤à¥‹à¤œà¤¨ बिना सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के अधूरा है। गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤ उगाना न केवल फायदेमंद होता है, बलà¥à¤•ि बेहद संतà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿à¤¦à¤¾à¤¯à¤• अनà¥à¤à¤µ à¤à¥€ होता है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि आप इसे अपने हाथों, अपने शà¥à¤°à¤® से उगाते हैं, जो ना केवल आपके डाइनिंग टेबल की शोà¤à¤¾ बà¥à¤¾à¤¤à¥‡ हैं, बलà¥à¤•ि यह आपके à¤à¥‹à¤œà¤¨ को पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र बनाता है।
आज हम जानेंगे उन 4 सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤ के बारे में जो à¤à¤¾à¤°à¤¤ की गरà¥à¤®à¥€ में à¤à¥€ अचà¥à¤›à¥€ तरह उगती हैं। अगर आप गà¥à¤°à¥€à¤·à¥à¤®à¤•ाल में इन चार सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को अपनी खेतों/बागवानी में उगाने के काम करते हैं, तो अवशà¥à¤¯ ये गरà¥à¤®à¥€ का मौसम आपके लिठवरदान साबित हो सकता है। ये 4 गà¥à¤°à¥€à¤·à¥à¤®à¤•ालीन सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ है:
टमाटर गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की सबसे अचà¥à¤›à¥€ सबà¥à¤œà¤¼à¥€ है। टमाटर का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² लगà¤à¤— हर à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ वà¥à¤¯à¤‚जन में किया जाता है—ताज़ी करी से लेकर ताज़ा सलाद à¤à¤µà¤‚ मसालेदार चटनी तक। टमाटर के सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ पौधे उगाने के लिठ25°C से अधिक तापमान की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। गरà¥à¤® तापमान टमाटर को जलà¥à¤¦à¥€ पकने के लिठà¤à¤•दम सही वातावरण पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है। ये न केवल मलà¥à¤Ÿà¥€-परà¥à¤ªà¤¸ हैं बलà¥à¤•ि इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उगाना à¤à¥€ बेहद आसान है। इसके बीज को हम सीधे बो सकते हैं। लेकिन हमें अंकà¥à¤°à¤£ के दौरान बीजों को नम रखना चाहिà¤à¥¤ टमाटर के पौधे के लिठधूप वाली जगह, अचà¥à¤›à¥€ जल निकासी वाली मिटà¥à¤Ÿà¥€ और लगातार पानी की ज़रूरत होती है। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे पौधा बनने के बाद इसमें पानी à¤à¤• या 2 दिन के अनà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤² में देना आवशà¥à¤¯à¤• है। सही देखà¤à¤¾à¤² के साथ, इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कंटेनर, हैंगिंग बासà¥à¤•ेट या सीधे ज़मीन में उगाया जा सकता है।
ताज़गी देने वाले, हाइडà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤‚ग à¤à¤µà¤‚ पानी की मातà¥à¤°à¤¾ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र खीरे की खेती मारà¥à¤š के महीने के लिठबेसà¥à¤Ÿ होती है। इसकी बà¥à¤µà¤¾à¤ˆ का सही समय मारà¥à¤š से अपà¥à¤°à¥ˆà¤² होता है। खीरे à¤à¤¾à¤°à¤¤ के गरà¥à¤® तापमान में पनपते हैं और तेज़ी से बढ़ते हैं, जिससे जलà¥à¤¦à¥€ परिणाम पाने की चाहत रखने वाले घरेलू बागवानों के लिठà¤à¤• बढ़िया आपà¥à¤¶à¤¨ हो सकते हैं। खीरे के बीजों को बोने से पहले à¤à¤¿à¤—ो लेना चाहिà¤à¥¤ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि à¤à¤¿à¤—ोठहà¥à¤ बीज जलà¥à¤¦à¥€ अंकà¥à¤°à¤¿à¤¤ होंगे। किसान इसकी खेती दोमट या बलà¥à¤ˆ मिटà¥à¤Ÿà¥€ में अचà¥à¤›à¥‡ से कर सकते हैं। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे खीरे को अधिक बहà¥à¤¤ पानी की ज़रूरत होती है, इसलिठनियमित रूप से पानी देना ज़रूरी है। गरà¥à¤®à¥€ में खीरे की सिंचाई 5-6 दिन के अंतराल पर करनी चाहिà¤à¥¤ खीरे की फसल में सही मातà¥à¤°à¤¾ में जैविक खाद, पोटाश और नाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ का उपयोग करने से 40-45 दिनों के बाद पहली तà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤ˆ की जा सकती है। चाहे आप उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ ज़मीन पर उगाà¤à¤ या कंटेनर में, खीरे पनपेंगे à¤à¤µà¤‚ आपको à¤à¤°à¤ªà¥‚र फ़सल देंगे।
à¤à¤¿à¤‚डी, या ओकरा कई à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ रसोई में à¤à¤• मà¥à¤–à¥à¤¯ वà¥à¤¯à¤‚जन है। à¤à¤¿à¤‚डी में विटामिन ठऔर सी, फोलेट और फाइबर जैसे पोषक ततà¥à¤µ à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में होते हैं। यह करी, सà¥à¤Ÿà¤¿à¤°-फà¥à¤°à¤¾à¤ˆ या कà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¥‡ फà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ बनाने के लिठà¤à¤•दम सही है। यह à¤à¤• लचीला पौधा है जो गरà¥à¤® और आरà¥à¤¦à¥à¤° जलवायॠमें पनपता है, जिससे यह à¤à¤¾à¤°à¤¤ में उगाई जाने वाली सबसे अचà¥à¤›à¥€ गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• बन जाती है। इस पौधे की देखà¤à¤¾à¤² कम करनी पड़ती है à¤à¤µà¤‚ इसे छोटे किचन गारà¥à¤¡à¤¨ और बड़े खेतों दोनों में उगाया जा सकता है। इसमें कम पानी की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है, इसकी सिंचाई 7-10 दिन के अंतराल पर करनी चाहिà¤à¥¤ अगर à¤à¤¿à¤‚डी की फसल में नाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨, फासà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸ और जैविक खाद का संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ उपयोग करें तो यह और बेहतर उपज दे सकता है। अपने चमकीले पीले फूलों के साथ लंबे, पतले पौधे जलà¥à¤¦ ही खाने योगà¥à¤¯ हरी फली में बदल जाते हैं जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हम सà¤à¥€ पसंद करते हैं। à¤à¤¿à¤‚डी की फसल सामानà¥à¤¯à¤¤à¤ƒ 2 से 3 महीनों में ही अचà¥à¤›à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ देना शà¥à¤°à¥‚ कर देती है।
लौकी à¤à¤¾à¤°à¤¤ की गरà¥à¤®à¥€ के मौसम के लिठà¤à¤• सूटेबल शबà¥à¤œà¥€ है। इस बहà¥à¤®à¥à¤–ी सबà¥à¤œà¥€ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ वà¥à¤¯à¤‚जनों में वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• रूप से किया जाता है, करी से लेकर सूप और यहाठतक कि "लौकी का जूस" जैसे पेय पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में à¤à¥€à¥¤ यह अपने ठंडक देने वाले गà¥à¤£à¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ उचà¥à¤š मातà¥à¤°à¤¾ में पानी होने के लिठजानी जाती है, जो इसे गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठà¤à¤•दम सही सबà¥à¤œà¥€ बनाती है। लौकी की बेलों को बढ़ने के लिठबहà¥à¤¤ जगह की ज़रूरत होती है, इसलिठयह बड़े बगीचों या वरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल गारà¥à¤¡à¤¨ के लिठआइडियल है। इसके लिठपूरी धूप, गरà¥à¤® तापमान और नियमित रूप से पानी देने की ज़रूरत होती है। गरà¥à¤®à¥€ के मौसम में 5 से 7 दिनों के अनà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤² में इसमें पानी देनी चाहिà¤à¥¤ लौकी की देखà¤à¤¾à¤² करना अपेकà¥à¤·à¤¾à¤•ृत आसान है और थोड़ी सी देखà¤à¤¾à¤² से, यह लंबे, पतले फल पैदा करेगी जो कई तरह के वà¥à¤¯à¤‚जनों के लिठà¤à¤•दम सही हैं। लौकी के फसल की बà¥à¤†à¤ˆ के 2 महीने के बाद फल तोड़ने योगà¥à¤¯ हो जाते हैं।