चना à¤à¤¾à¤°à¤¤ की à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ दलहनी फसल है, जिसे मà¥à¤–à¥à¤¯à¤¤à¤ƒ रबी के मौसम में उगाया जाता है। हमारे à¤à¥‹à¤œà¤¨ का à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ हिसà¥à¤¸à¤¾ होने के साथ-साथ इसके फली à¤à¤µà¤‚ तने का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— पशà¥à¤“ं के चारे के तौर पर à¤à¥€ किया जाता है. चना पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ का महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ होता है. देश में बड़े पैमाने पर इसकी खपत होने के साथ-साथ निरà¥à¤¯à¤¾à¤¤ à¤à¥€ किया जाता है. इस पà¥à¤°à¤•ार यह देश की कृषि अरà¥à¤¥à¤µà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के विकास में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ योगदान देता है। इसके लिठचने की फसल का बेहतर उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ जरà¥à¤°à¥€ है. और यह तà¤à¥€ संà¤à¤µ है जब चने की बà¥à¤†à¤ˆ से लेकर कटाई तक इसकी बेहतर देखà¤à¤¾à¤² की जाà¤. चने की खेती में अनेक कीटों का पà¥à¤°à¤•ोप देखा जाता है, जो फसल की उपज को काफी नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाते हैं। इसलिठजरà¥à¤°à¥€ है इन हानिकारक कीटों की पहचान कर समय पर नियंतà¥à¤°à¤£ के उपाय करना. आज हम इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में चने की फसल में लगने वाले पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कीटों की पहचान के तरीके, कीटों के जीवन-काल, à¤à¤µà¤‚ होने वाले नà¥à¤•सान के बारे में जानकारी पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ कर उनके पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ नियंतà¥à¤°à¤£ के उपाय के बारे में चरà¥à¤šà¤¾ करने वाले हैं.
चना के जड़, तने à¤à¤µà¤‚ फली पर आकà¥à¤°à¤®à¤£ कर नà¥à¤•सान पहà¥à¤à¤šà¤¾à¤¨à¥‡ वाले पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कीटें निमà¥à¤¨ हैं:

यह कीट सबसे अधिक हानिकारक माना जाता है। वयसà¥à¤• कीट जिसे पतिंगा कहा जाता है, 30 से 36 मिलीमीटर चौड़े पंख वाले होते हैं, जिसके शरीर की लमà¥à¤¬à¤¾à¤ˆ 14 से 18 मिलीमीटर होती है. इसके अगले पंख में धारियां होती है à¤à¤µà¤‚ पंख में ऊपर की ओर किडनीनà¥à¤®à¤¾ विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ आकार के काले धबà¥à¤¬à¥‡ बने होते हैं. वहीठइसके निचले पंख सफ़ेद à¤à¤µà¤‚ हलà¥à¤•े होते हैं. इस कीट को ऊपर से देखने पर ये à¤à¥‚रे पीले या हलà¥à¤•े पीले à¤à¥‚रे रंग के दीखते हैं.
मादा कीट अपने पूरे जीवनकाल में 500 से 750 तक अंडे देने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ रखती है, जिनसे 4 से 6 दिन में बचà¥à¤šà¥‡ (इलà¥à¤²à¥€) निकलते हैं. इसके बचà¥à¤šà¥‡ यानी इलà¥à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का जीवनकाल 15 से 28 दिन का होता है. अपने पूरे जीवन काल में यह 5 बार केंचà¥à¤² बदलती है.
कीट के बचà¥à¤šà¥‡ अपना आहार चने के मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® तनों à¤à¤µà¤‚ पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को बनाते हैं. जब पौधे में फली आने लगती है, तो फिर ये फली को छेदकर अनà¥à¤¦à¤° के दाने को खा जाती है.
फली छेदक कीटों को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने के लिठकृषिगत, यांतà¥à¤°à¤¿à¤•, जैविक à¤à¤µà¤‚ रासायनिक उपाय अपनाठजा सकते हैं:

यह à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का बहà¥à¤à¤•à¥à¤·à¥€ कीट है, जो सबसे अधिक हानिकारक माना जाता है, जो सफ़ेद à¤à¤µà¤‚ मटमैले रंग का होता है। ये कीट सामाजिक संरचना लिठहोते हैं, इसलिठइसे सोशल इनà¥à¤¸à¥‡à¤•à¥à¤Ÿ माना जाता है. ये कामगार, राजा, रानी जैसे विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ जातियों में बटें होते हैं.
रानी दीमक अपने पूरे जीवन-काल में 30 हजार तक अंडे देने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ रखती है. अंडे परिपकà¥à¤µ हो जाने के बाद उससे अरà¥à¤à¤• निकलते हैं. 6 से 8 माह के बाद ये अरà¥à¤à¤• वयसà¥à¤• बन जाते हैं.
इसमें à¤à¤• कामगार/शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤• वरà¥à¤— का दीमक होता है, यही फसल को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाता है. जड़ या तना को छेदकर या खà¥à¤°à¤šà¤•र खाता जाता है, जिससे पौधे सूखने लगते हैं à¤à¤µà¤‚ चने के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ में 30–60% तक की गिरावट आ सकती है।
दीमक को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने के लिठकृषिगत पà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ में कà¥à¤› बदलाव लाने के साथ-साथ यांतà¥à¤°à¤¿à¤•, जैविक, à¤à¤µà¤‚ रासायनिक उपाय अपनाने चाहिà¤.

यह हरे रंग का होता है, जिसके शरीर पर पतली रेखा बनी होती है. यह अपने पीठकूबड़ बना-बना कर यानी पीठको उठा-उठाकर चलता/रेंगता है. इसी चलने के तरीके के कारण इस कीट को सेमीलूपर नाम दिया गया है.
सेमीलूपर की मादा कीट अपने पूरे जीवन-काल में 400 से 500 तक अंडे देने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ रखती है. ये अंडे समूहों में पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के ऊपर देती है, जिससे 6 से 7 दिन में सà¥à¤‚डियां निकलने लगती है. सà¥à¤‚डियों का जीवन-काल 30 से 40 दिन का होता है. ये पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को लपेटकर पà¥à¤¯à¥‚पा बना लेती है.
सेमीलूपर कीट का मà¥à¤–à¥à¤¯ आहार फसल की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ होती है, जिसे यह कà¥à¤¤à¤°-कà¥à¤¤à¤° कर खा जाता है. पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ पर सेमीलूपर कीटों के आकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण चने के पौधे कमजोर à¤à¤µà¤‚ सफ़ेद होने लगते हैं. इसके अलावे ये अपना आहार फूलों, नई कलियों, à¤à¤µà¤‚ विकसित होने वाले दानों को à¤à¥€ बनाती है.
सेमीलूपर कीट को कृषिगत, रासायनिक, à¤à¤µà¤‚ जैविक उपायों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया जा सकता है:

यह दिखने में à¤à¥‚रे-मटमैले रंग का होता है. इसका à¤à¥‚रापन थोड़ा कालापन लिठहोता है. इसकी लमà¥à¤¬à¤¾à¤ˆ 3 से 5 सेमी की हो सकती है.
मादा कटà¥à¤µà¤¾ कीट अपने पूरे जीवन-काल में 300 तक अंडे देने में सकà¥à¤·à¤® होती हैं. ये तने या पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के दोनों तरफ या फिर मिटà¥à¤Ÿà¥€ के ढेलों में अंडे देती हैं. अंडे से इलà¥à¤²à¤¿à¤¯à¤¾à¤ यानी बचà¥à¤šà¥‡ 8 से 10 दिन में निकलते हैं. अंडे से निकलने के बाद 3 से 5 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक ये फसलों को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाते हैं.
ये किटें दिन में मिटà¥à¤Ÿà¥€ में या पौधे के तने के बीच कहीं छिपी रहती है, जो रात में निकलकर कोमल पौधों, तनों à¤à¤µà¤‚ शाखाओं को जड़ से काटती है à¤à¤µà¤‚ कटे हà¥à¤ à¤à¤¾à¤— को à¤à¥‹à¤œà¤¨ के रूप में मिटà¥à¤Ÿà¥€ के अनà¥à¤¦à¤° खींच कर ले जाती है.
कृषिगत à¤à¤µà¤‚ रासायनिक तरीकों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कटà¥à¤µà¤¾ कीटों पर समय रहते नियंतà¥à¤°à¤£ पाकर चनें के फसलों को नà¥à¤•सान से बचाया जा सकता है.
अगर समय पर कीट-पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन किया जाà¤, तो à¤à¤• सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ फसल के साथ-साथ उचà¥à¤š पैदावार पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किया जा सकता है. हमनें ऊपर चने को नà¥à¤•सान पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कीटों के बारे में जानकारी दी है. विशेषकर कीटों को पहचानने à¤à¤µà¤‚ नियंतà¥à¤°à¤£ पर विशेष फोकस किया है. कà¥à¤¯à¥‚ंकि बिना फसल के दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨à¥‹à¤‚ की पहचान कर हम समय पर अपने फसल को कीटों से होने वाले नà¥à¤•सान से बचा सकते हैं.