पोषक ततà¥à¤µ पौधों के विकास, फूल, फल à¤à¤µà¤‚ बीज निरà¥à¤®à¤¾à¤£ के लिठअतà¥à¤¯à¤‚त आवशà¥à¤¯à¤• होते हैं। ये ततà¥à¤µ पौधों के पà¥à¤°à¤•ाश संशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ निरà¥à¤®à¤¾à¤£, कोशिकीय विà¤à¤¾à¤œà¤¨, जल à¤à¤µà¤‚ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¾à¤‚तरण जैसे जैविक कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में à¤à¤¾à¤— लेते हैं। इनकी कमी से पौधे कमजोर हो जाते हैं à¤à¤µà¤‚ उनका जीवन चकà¥à¤° पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होता है।
à¤à¤¾à¤°à¤¤ सांसà¥à¤•ृतिक के साथ-साथ à¤à¥Œà¤—ोलिक पटल पर à¤à¥€ विविधताओं का देश है। यहाठकà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° — काली, लाल, जलोढ़, बलà¥à¤ˆ आदि कई पà¥à¤°à¤•ार की मिटà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾à¤ पाई जाती हैं। जलवायॠà¤à¤µà¤‚ अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• खेती के कारण अधिकतर मिटà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी पाई जाती है। मिटà¥à¤Ÿà¥€ के पà¥à¤°à¤•ार और उनमें पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की सामानà¥à¤¯ कमी से संबंधित कà¥à¤› तथà¥à¤¯ नीचे दिठजा रहे हैं:
इस पà¥à¤°à¤•ार à¤à¤¾à¤°à¤¤ के पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• किसान के लिठपोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की जानकारी à¤à¤µà¤‚ उसकी कमी की समय पर पहचान और उसकी पूरà¥à¤¤à¤¿ के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ उरà¥à¤µà¤°à¤• की जानकारी होनी आवशà¥à¤¯à¤• है। अतः यह आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ किसान के लिठमहतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यहाठहम à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ किसानों की इसी सामानà¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾ के समाधान हेतॠततà¥à¤ªà¤°à¤¤à¤¾ दिखाने वाले हैं।
पौधों दवारा गà¥à¤°à¤¹à¤£ की जाने वाली मातà¥à¤°à¤¾ के हिसाब से हम पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ को 3 à¤à¤¾à¤—ों में वरà¥à¤—ीकृत कर सकते हैं:
पà¥à¤°à¤®à¥à¤– पोषक ततà¥à¤µ (Macronutrients): ये ततà¥à¤µ पौधे दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सबसे अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में गà¥à¤°à¤¹à¤£ किये जाते हैं, जो हैं-
दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯à¤• पोषक ततà¥à¤µ (Secondary nutrients): इस वरà¥à¤— में हम उन पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ को रखते हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पौधे दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बहà¥à¤¤ ही अलà¥à¤ª मातà¥à¤°à¤¾ में गà¥à¤°à¤¹à¤£ किये जाते हैं, जो हैं-
सूकà¥à¤·à¥à¤® पोषक ततà¥à¤µ (Micronutrients): इनके अंतरà¥à¤—त हम उन ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ को रख सकते हैं, जिनका पौधे अपने विकास के लिठसूकà¥à¤·à¥à¤® मातà¥à¤°à¤¾ में गà¥à¤°à¤¹à¤£ करते हैं, जो हैं-
किसी à¤à¥€ पौधे के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ में 95% à¤à¤¾à¤— हाइडà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨, कारà¥à¤¬à¤¨, à¤à¤µà¤‚ ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ का होता है, à¤à¤µà¤‚ शेष 5% à¤à¤¾à¤— का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ ऊपर बताये अनà¥à¤¯ ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ से होता है। लेकिन सà¤à¥€ 16 ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ का किसी à¤à¥€ सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ फसल के लिठअहमॠहोता है। किसी à¤à¥€ à¤à¤• की कमी सà¤à¥€ जैविक कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती है। फसल दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ इनके गà¥à¤°à¤¹à¤£ की मातà¥à¤°à¤¾ से किसी à¤à¥€ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की महतà¥à¤¤à¤¾ निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ नहीं की जा सकती है। कà¥à¤² मिलाकर कहें तो किसानों को बेहतर उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤•ता की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के लिठअपने फसलों में ऊपर बताये सà¤à¥€ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की जरà¥à¤°à¥€ मातà¥à¤°à¤¾ में उपलबà¥à¤§à¤¤à¤¾ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना अति आवशà¥à¤¯à¤• है।
किसी पौधे के लिठपà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• पोषक ततà¥à¤µ के अपने-अपने कारà¥à¤¯ हैं, जिसे केवल वही पोषक ततà¥à¤µ पूरा कर सकता है। आइये जानते हैं पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ के कारà¥à¤¯ के बारे में-
नाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨- यह ततà¥à¤µ पौधे के विकास à¤à¤µà¤‚ वृदà¥à¤§à¤¿ में सहायक होता है। यह पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ के सà¤à¥€ अवयवों (Elements) के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ में सहायक बनकर उपज में वृदà¥à¤§à¤¿à¤‚ करता है।
फासà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸- कोशिका विà¤à¤¾à¤œà¤¨, जड़ों की वृदà¥à¤§à¤¿, फूलों à¤à¤µà¤‚ फलों के विकास à¤à¤µà¤‚ फसल के पकने में सहायक होता है।
पोटैशियम- यह मंड, शरà¥à¤•रा à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने के साथ पौधे की रोगों, कीड़े-मकौड़ों, à¤à¤µà¤‚ पाले से रकà¥à¤·à¤¾ कर फसल की कà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ में सà¥à¤§à¤¾à¤° करता है।
गंधक- यह पौधे में उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ वाले सिसà¥à¤Ÿà¥€à¤¨, सिसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¨, मिथियोनिन अमीनों अमà¥à¤²à¥‹à¤‚ का जरà¥à¤°à¥€ अवयव (element) है। गंधक जड़ गà¥à¤°à¤‚थियों, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ à¤à¤µà¤‚ तेल के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ में सहायक होता है।
कैलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤®- यह जड़ों की वृदà¥à¤§à¤¿ à¤à¤µà¤‚ पौधे के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंगों की रचना à¤à¤µà¤‚ विकास के लिठजरà¥à¤°à¥€ शरà¥à¤•रा à¤à¤µà¤‚ पानी की पूरà¥à¤¤à¤¿ में सहायक होता है।
मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤®- यह कà¥à¤²à¥‹à¤°à¥‹à¤«à¤¿à¤² का मà¥à¤–à¥à¤¯ अवयव (element) है, जो पौधे की विकास à¤à¤µà¤‚ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ के लिठजरà¥à¤°à¥€ है।
बोरोन- यह पौधे में जटिल रासायनिक कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं à¤à¤µà¤‚ कोशिका विà¤à¤¾à¤œà¤¨ में सहायक होता है। इसके साथ ही पोटेशियम à¤à¤µà¤‚ कैलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤® के अनà¥à¤ªà¤¾à¤¤ को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने, नà¥à¤¯à¥‚कà¥à¤²à¤¿à¤• अमà¥à¤², शरà¥à¤•रा और हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥à¤¸ के निरà¥à¤®à¤¾à¤£, à¤à¤µà¤‚ पौधे के नठअंगों के विकास में सहायक होता है।
लोहा- शरà¥à¤•रा à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ संशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ के साथ à¤à¤‚जाइम का वाहक बनकर पौधे की सà¥à¤šà¤¾à¤°à¥‚ शà¥à¤µà¤¸à¤¨ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में सहयोग करता है।
मैगà¥à¤¨à¥€à¤œ- पौधे में नाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ à¤à¤µà¤‚ लोहे की जैविक कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करने के साथ à¤à¤¸à¥à¤•ोरà¥à¤¬à¤¿à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ के अवशोषण में कैटेलिसà¥à¤Ÿ का काम करता है।
तांबा- यह à¤à¤‚जाइम में इलेकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¨ को ढोने का कारà¥à¤¯ करता है, जो पौधे में ऑकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤¶à¤¨ à¤à¤µà¤‚ रिडेकà¥à¤¸à¤¨ पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤¸ में सहायक होते हैं।
जसà¥à¤¤à¤¾- पौधे में हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥à¤¸ के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ के साथ-साथ, रोग-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¥€ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ में वृदà¥à¤§à¤¿ करता है। इसके साथ ही यह फासà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸ à¤à¤µà¤‚ नाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ के उपयोग में सहायक होता है।
मालिबà¥à¤¡à¥‡à¤®- दलहनी फसलों में जड़ों में नाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ के संगà¥à¤°à¤¹ करने वाले जीवाणà¥à¤“ं के कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में सहायता करता है।
कà¥à¤²à¥‹à¤°à¤¿à¤¨- पौधे के रंगों को पैदा करने में सहायक होता है। इसके साथ ही यह फसलों को जलà¥à¤¦ पकने में मदद करता है।
जब पौधे के जरà¥à¤°à¥€ निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में पोषक ततà¥à¤µ उपलबà¥à¤§ नहीं होने लगते हैं, तो इसके पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤µà¤°à¥à¤ª पौधे की जैविक कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं पर असर पड़ता है। जिसका असर पौधे पर सà¥à¤ªà¤¸à¥à¤Ÿ रूप से नजर आने लगता है। चूà¤à¤•ि पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• पोषक ततà¥à¤µ के अपने अलग-अलग योगदान होते हैं, जैसा की हमनें ऊपर à¤à¥€ देखा, इसलिठपà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• पोषक ततà¥à¤µ की कमी के à¤à¥€ अपने-अपने पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ होते हैं। जिससे पौधे में अमà¥à¤• पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी की पहचान आसानी से की जा सकती है à¤à¤µà¤‚ समय पर उरà¥à¤µà¤°à¤• के पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ उन पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी की पूरà¥à¤¤à¤¿ की जा सकती हैं। तो आइये जानते हैं पोषक ततà¥à¤µ की कमी के लकà¥à¤·à¤£ à¤à¤µà¤‚ कमी को दूर करने के उपाय के बारे में।
कमी के संकेत-
कमी को दूर करने के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ उरà¥à¤µà¤°à¤•-
कमी के संकेत-
कमी को दूर करने के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ उरà¥à¤µà¤°à¤•-
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कमी को दूर करने के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ उरà¥à¤µà¤°à¤•-
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कमी को दूर करने के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ उरà¥à¤µà¤°à¤•-
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कमी को दूर करने के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ उरà¥à¤µà¤°à¤•-
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कमी को दूर करने के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ उरà¥à¤µà¤°à¤•-
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कमी को दूर करने के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ उरà¥à¤µà¤°à¤•-
कमी के संकेत-
कमी को दूर करने के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ उरà¥à¤µà¤°à¤•-
कमी के संकेत-
कमी को दूर करने के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ उरà¥à¤µà¤°à¤•-
कमी के संकेत-
कमी दूर करने के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ उरà¥à¤µà¤°à¤•-
कमी के संकेत-
कमी दूर करने के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ उरà¥à¤µà¤°à¤•-
कमी के संकेत-
कमी दूर करने के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ उरà¥à¤µà¤°à¤•-
कमी के संकेत-
कमी दूर करने के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ उरà¥à¤µà¤°à¤•-
फसलों को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ बनाठरखने के लिठपोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की पूरà¥à¤¤à¤¿ आवशà¥à¤¯à¤• है। उरà¥à¤µà¤°à¤• इस कमी को पूरा करने का सबसे पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ माधà¥à¤¯à¤® हैं:
फसलों की उचà¥à¤š गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ à¤à¤µà¤‚ अधिक उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ के लिठपौधों को संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। किसानों को चाहिठकि वे समय-समय पर मिटà¥à¤Ÿà¥€ की जाà¤à¤š कराà¤à¤‚ à¤à¤µà¤‚ उसकी आवशà¥à¤¯à¤•ता के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° उरà¥à¤µà¤°à¤•ों का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करें। सà¤à¥€ किसानों की पहà¥à¤à¤š मिटà¥à¤Ÿà¥€ जाà¤à¤š लैब तक नहीं हो सकती है, उनके लिठऊपर बताये तरीकों से मिटà¥à¤Ÿà¥€ में पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी का आकलन किया जा सकता है। इसके लिठकिसानों को निरंतर पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, जड़ों à¤à¤µà¤‚ तनों की मोनिटरिंग करते रहने की जरà¥à¤°à¤¤ है।