खेती में अचà¥à¤›à¥€ पैदावार पाने के लिठयह जरूरी है कि फसल को सही समय पर सà¤à¥€ आवशà¥à¤¯à¤• पोषक ततà¥à¤µ मिलें। लेकिन कई बार मिटà¥à¤Ÿà¥€ में किसी खास ततà¥à¤µ की कमी हो जाती है, जिसका सीधा असर पौधों की वृदà¥à¤§à¤¿ à¤à¤µà¤‚ उपज पर पड़ता है। इसलिठयह जानना बहà¥à¤¤ जरूरी है कि फसलों में पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी को कैसे पहचाना जाà¤à¥¤ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि बिना इसकी जानकारी के उपयà¥à¤•à¥à¤¤ खाद का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— नहीं कर पाà¤à¤‚गे। और गलत खाद का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— à¤à¥€ कई बार पौधों को नà¥à¤•सान पहà¥à¤à¤šà¤¾à¤¨à¥‡ का काम करता है। वैसे तो फसल बà¥à¤†à¤ˆ के पहले मिटà¥à¤Ÿà¥€ को पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—शाला में लेजाकर मृदा परीकà¥à¤·à¤£ (Soil Testing) कर पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की मातà¥à¤°à¤¾ की जाà¤à¤š करने की सलाह दी जाती है, लेकिन पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—शाला तक सà¤à¥€ किसानों की पहà¥à¤à¤š नहीं होती है। वैसे किसानों की मदद के लिठआज हम इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में à¤à¤• तरीके का विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ करने वाले हैं, जिससे किसान पौधे की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ देख कर ये जान पाà¤à¤‚गें कि मिटà¥à¤Ÿà¥€ में फसल के सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ विकास के लिठआवशà¥à¤¯à¤• कौन से पोषक ततà¥à¤µ की कमी है। आइये सबसे पहले जानें फसलों के लिठआवशà¥à¤¯à¤• पोषक ततà¥à¤µ कौन-कौन से हैं।
फसलों के लिठकà¥à¤² मिलाकर 17 पोषक ततà¥à¤µ आवशà¥à¤¯à¤• माने जाते हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ तीन à¤à¤¾à¤—ों में बाà¤à¤Ÿà¤¾ गया है:
ये पोषक ततà¥à¤µ फसलों के विकास में सबसे अधिक à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¥‡ हैं:
हालांकि इनकी मातà¥à¤°à¤¾ कम होती है, लेकिन ये à¤à¥€ उतने ही ज़रूरी हैं:
उपरà¥à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ बताये पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की किसी मिटà¥à¤Ÿà¥€ में कमी होने पर फसल का सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ विकास संà¤à¤µ नहीं है। इसलिठआज हम या जानेंगे की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के रंग और रà¥à¤ªà¤°à¥‡à¤–ा को देखकर कैसे कर सकते हैं पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी की पहचान।
अगर अमà¥à¤• पौधे के विकास के लिठमिटà¥à¤Ÿà¥€ में किसी पोषक ततà¥à¤µ की कमी होती है, तो पौधों पर उसका असर सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ दिखाई देता है। विशेषकर पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के विकास, रंग, à¤à¤µà¤‚ रà¥à¤ªà¤°à¥‡à¤–ा पर पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी का तà¥à¤°à¤‚त असर पड़ता है। अलग-अलग पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ का कमी का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ पर अलग-अलग पड़ता है। पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ पर पड़ने वाले इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ का अवलोकन कर हम मिटà¥à¤Ÿà¥€ में पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी का पता लगा सकते हैं। आइये à¤à¤•-à¤à¤• कर जानते हैं फसल के लिठआवशà¥à¤¯à¤• पोषक ततà¥à¤µ à¤à¤µà¤‚ उनकी कमी से पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ पर पड़ने वाले पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ के बारे में-

पौधे के सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ विकास के लिठबोरोन का महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है, यह पौधों में कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¤°à¤£, कोशिका à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€, परागकणों के अंकà¥à¤°à¤£ व कोशिका विà¤à¤¾à¤œà¤¨ के लिठà¤à¤• आवशà¥à¤¯à¤• पोषक ततà¥à¤µ है।
इसकी कमी से फसल के विकास कर रहे यानी वरà¥à¤§à¤¨à¤¶à¥€à¤² à¤à¤¾à¤— के पास पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का रंग पीला हो जाता है। पौधे की कलियाठसफ़ेद या हलà¥à¤•े à¤à¥‚रे रंग की हो जाती है। यह लकà¥à¤·à¤£ अगर किसी पौधे में पता चले तो आप यह जानें कि मिटà¥à¤Ÿà¥€ में बोरोन की कमी है, जिससे पौधे अपने विकास के लिठआवशà¥à¤¯à¤• बोरोन की मातà¥à¤°à¤¾ गà¥à¤°à¤¹à¤£ नहीं कर पा रहे हैं।
पौधे के विकास के लिठपोषक ततà¥à¤µ कैलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤® का बहà¥à¤¤ ही महतà¥à¤¤à¥à¤µ है, इसके होने से पौधे की जड़ें पानी में उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ पोषक ततà¥à¤µ को अवशोषित करता है। पौधे के सेलà¥à¤¸ à¤à¤µà¤‚ फल के लिठà¤à¥€ यह बहà¥à¤¤ ही आवशà¥à¤¯à¤• ततà¥à¤µ है।
मिटà¥à¤Ÿà¥€ में कैलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤® की कमी पौधे की पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ पर सबसे पहले पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ डालते हैं, जिससे सबसे कलियाठके टॉप ख़राब हो जाते हैं à¤à¤µà¤‚ इनकी नोरà¥à¤•ें चिपक जाती है। यदि पौधे में ये लकà¥à¤·à¤£ उà¤à¤° कर आते हैं, तो आप समठसकते हैं कि मिटà¥à¤Ÿà¥€ में कैलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤® की कमी है।
खरीफ, दलहनी à¤à¤µà¤‚ तिलहनी सहित अनà¥à¤¯ फसलों सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ विकास के लिठगंधक का महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है, यह पौधों में कà¥à¤²à¥‹à¤°à¥‹à¤«à¤¿à¤² के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ में सहायक होता है। यह जड़ों à¤à¤µà¤‚ पौधों के विकास में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है।
इसकी मिटà¥à¤Ÿà¥€ में कमी से पौधे की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, शिराà¤à¤‚ गहरे हरे से पीले रंग में बदल जाता है, à¤à¤µà¤‚ बाद में सफ़ेद रंग का हो जाता है। उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय है कि सबसे पहले इनका पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ नई पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में देखा जाता है। अगर किसी à¤à¥€ किसान को पौधे की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ब में ये लकà¥à¤·à¤£ दिखाठदेते हैं, तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मिटà¥à¤Ÿà¥€ में गंधक की कमी पूरा करने वाला रासायनिक खाद डालना चाहिà¤à¥¤
पौधे में लोहा कà¥à¤²à¥‹à¤°à¥‹à¤«à¤¿à¤² à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ बनाने में सहायक होता है। यह फसल की उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤•ता à¤à¤µà¤‚ सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ विकास में सहायक होता है।
पौधों में इसकी कमी से तने के उपरी à¤à¤¾à¤— पर सबसे पहले हरितिमाहीन के लकà¥à¤·à¤£ दिखाठपड़ने लगते हैं। इसकी कमी होने से शिराओं के अलावे पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का रंग पीला हो जाता है। कमी होने पर पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ पर à¤à¥‚रे रंग का धबà¥à¤¬à¤¾ या मृत उतà¥à¤¤à¤• के लकà¥à¤·à¤£ पà¥à¤°à¤•ट होते हैं।
किसी à¤à¥€ पौधे के सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ विकास के लिठयह बहà¥à¤¤ ही महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ पोषक ततà¥à¤µ है। यह पौधों की जड़ों à¤à¤µà¤‚ पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में हरीतिमा के विकास में सहायक होता है।
इसकी मिटà¥à¤Ÿà¥€ में कमी होने से पौधे को आवशà¥à¤¯à¤• मैगनीज नहीं मिल पाते हैं, जिससे पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का रंग पीला-धूसर या लाल-धूसर हो जाता है लेकिन शिराà¤à¤ हरी होती है। पतà¥à¤¤à¥€ के किनारे का à¤à¤¾à¤— और शिरा का बिचला à¤à¤¾à¤— हरितिमाहीन हो जाता है। हरीतिमाहीन पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ अपने सामानà¥à¤¯ आकार में होती है। पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में इन लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के उà¤à¤°à¤¨à¥‡ पर आप ये समठसकते हैं कि पौधे को मैगनीज पोषक ततà¥à¤µ की उचित मातà¥à¤°à¤¾ नहीं मिल पा रही है।
पौधे à¤à¤µà¤‚ तनों के विकास के लिठतामà¥à¤¬à¥‡ का बहà¥à¤¤ महतà¥à¤¤à¥à¤µ है। इसकी मिटà¥à¤Ÿà¥€ में जरà¥à¤°à¥€ मातà¥à¤°à¤¾ होने पर बीज का सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ विकास संà¤à¤µ हो पाता है।
मिटà¥à¤Ÿà¥€ में इसकी कमी से नई पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¤• साथ गहरी पीले रंग की हो जाती है, तथा सूख कर गिरने लगती है। à¤à¤¸à¥‡ लकà¥à¤·à¤£ से तांबे की कमी समà¤à¥€ जा सकती है।
यह पौधों विकास के लिठबहà¥à¤¤ ही अहमॠपोषक ततà¥à¤µ है, जो पौधे के विकास à¤à¤µà¤‚ बेहतर उपज के लिठबहà¥à¤¤ ही महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है।
पौधे में इसकी कमी से पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के शिराओं के मधà¥à¤¯ हरीतिमा के लकà¥à¤·à¤£ दिखाई पड़ती है। à¤à¤µà¤‚ पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¨ का रंग कासा की तरह हो जाता है। इन लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के उà¤à¤°à¤¨à¥‡ को मिटà¥à¤Ÿà¥€ में जसà¥à¤¤à¤¾ की कमी माना जाता है।
पौधे में यह नाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ के अवशोषण, नाइटà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ को कम करने में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है। यह पà¥à¤°à¤•ृति पà¥à¤°à¤¦à¤¤à¥à¤¤ नाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ को पौधों के लिठउपयोगी बनाता है।
इसकी कमी से पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ सूख जाती है à¤à¤µà¤‚ हलà¥à¤•े हरे रंग की हो जाती है। मधà¥à¤¯ शिराओं को छोड़कर पूरी पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ पर सूखे हरे धबà¥à¤¬à¥‡ दिखाई देते हैं। इसकी कमी से पौधे में नाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ की कमी हो जाती है, जिसके पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ से पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का हरापन ख़तम हो जाता है।
मिटà¥à¤Ÿà¥€ में फासà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸ की उचित मातà¥à¤°à¤¾ होने पर बीज का सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ अंकà¥à¤°à¤£ होता है, à¤à¤µà¤‚ पौधे का उचित à¤à¤µà¤‚ तेजी से विकास संà¤à¤µ होता है।
इसकी मिटà¥à¤Ÿà¥€ में कमी होने से पौधे की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ छोटी रह जाती है तथा पौधे का रंग गà¥à¤²à¤¾à¤¬à¥€ à¤à¤µà¤‚ गहरा हरा हो जाता है।
पोटेशियम पौधे की वृदà¥à¤§à¤¿ के लिठबहà¥à¤¤ ही आवशà¥à¤¯à¤• है। यह जड़, तना à¤à¤µà¤‚ पतà¥à¤¤à¥€ के विकास में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है। मिटà¥à¤Ÿà¥€ से जल को अवशोषित कर पूरे पौधे में उसको पहà¥à¤šà¤¾à¤¨à¥‡ की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में पोटेशियम का महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ होता है।
इस पोषक ततà¥à¤µ की कमी होने पर पौधे के पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का रंग पीला या à¤à¥‚रा हो जाता है। इसके साथ ही पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के बाहरी किनारे कट-फट जाते हैं। à¤à¤¸à¥‡ लकà¥à¤·à¤£ के उà¤à¤°à¤¨à¥‡ पर आप मिटà¥à¤Ÿà¥€ में पोटेशियम की कमी को जान सकते हैं।
यह पà¥à¤°à¤•ाश संशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£, अमीनो à¤à¤¸à¤¿à¤¡, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ à¤à¤µà¤‚ डीà¤à¤¨à¤ के संशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है। इसकी कमी से पौधे धीमे गति से विकास करता है।
इसकी कमी से पौधे की पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ हलà¥à¤•ी पीली हो जाती है यानी पतà¥à¤¤à¥€ का हरापन ख़तम हो जाता है। ये लकà¥à¤·à¤£ मिटà¥à¤Ÿà¥€ में नाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ की पà¥à¤°à¤šà¥à¤° मातà¥à¤°à¤¾ की कमी को बताती है।
पोषक ततà¥à¤µ फसल की रीढ़ होते हैं। सही समय पर, सही मातà¥à¤°à¤¾ में à¤à¤µà¤‚ सही पà¥à¤°à¤•ार के पोषक ततà¥à¤µ देने से ही सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ फसल और उचà¥à¤š उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ संà¤à¤µ है। इसके लिठसमय रहते पोषक ततà¥à¤µ की कमी को खाद के छिड़काव दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पूरी की जा सकती है। आप पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी से पौधे की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की रà¥à¤ªà¤°à¥‡à¤–ा à¤à¤µà¤‚ उनमें उà¤à¤°à¤¨à¥‡ वाले लकà¥à¤·à¤£ के आधार पर à¤à¥€ समय रहते पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी का पता लगा कर फसल को ख़राब होने से बचा सकते हैं। वैसे तो किसानों को हमारी सलाह है कि किसी à¤à¥€ फसल को बोने से पहले मृदा का परिकà¥à¤·à¤£ अवशà¥à¤¯ करवा लें। जिन किसानों का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—शाला तक पहà¥à¤à¤š संà¤à¤µ नहीं है वे पौधे की बà¥à¤†à¤ˆ/रोपाई के बाद पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का निरंतर निरिकà¥à¤·à¤£ कर मिटà¥à¤Ÿà¥€ में पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी का पता लगा सकते हैं। हमारा उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ हर कदम पर किसानों के सहायक के तौर पर उà¤à¤°à¤¨à¥‡ का है।