à¤à¤¾à¤°à¤¤ में यह तकनीक अपने विकास के पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• चरण में है, लेकिन विदेशों में ‘’ हाइडà¥à¤°à¥‹à¤ªà¥‹à¤¨à¤¿à¤• फारà¥à¤®à¤¿à¤‚ग’’ का किसानों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बहà¥à¤¤à¤¾à¤¯à¤¤ में पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया जाता रहा है। लेकिन हाल ही में à¤à¤¾à¤°à¤¤ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨, IIT कानपà¥à¤° के वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ों ने मिटà¥à¤Ÿà¥€ के बिना खेती करने के इस तकनीक को à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ कृषि परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤•ूल, किफायती à¤à¤µà¤‚ सरल बनाकर à¤à¤¾à¤°à¤¤ में इसे चरà¥à¤šà¤¾ में ले आया है à¤à¤µà¤‚ छोटे किसानों की à¤à¥€ इस तकनीक तक पहà¥à¤à¤š सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ कर दी है। इस नठतकनीक के माधà¥à¤¯à¤® से अब हमारे à¤à¥‹à¤œà¤¨ के लिठआवशà¥à¤¯à¤• उनà¥à¤¨à¤¤ किसà¥à¤® की फसलें बिना मिटà¥à¤Ÿà¥€ के उगाई जा सकेंगी। यह सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ में अजीब लग सकता है, कि बिना मिटà¥à¤Ÿà¥€ के फसल कैसे उगा सकते हैं। लेकिन यह सच है à¤à¤µà¤‚ हमारे देश के वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ों ने अब इस तकनीक के माधà¥à¤¯à¤® से केसर, अनानास, सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤¬à¥‡à¤°à¥€ जैसे फसलों को बिना मिटà¥à¤Ÿà¥€ के उगाना संà¤à¤µ बना दिया है। यह तकनीक कृषि कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में आगे चलकर à¤à¤• कà¥à¤°à¤¾à¤‚ति लाने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ रखता है। यह न केवल किसानों के लिठवरदान साबित होने वाला है, बलà¥à¤•ि यह उन तमाम लोगों के लिठà¤à¤• उमà¥à¤®à¥€à¤¦ की किरण की तरह है, जो परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ के संकट à¤à¤µà¤‚ बढ़ती जनसंखà¥à¤¯à¤¾ के बीच फ़ूड सिकà¥à¤¯à¥‹à¤°à¤¿à¤Ÿà¥€ को लेकर चिंतित हैं। आज हम आपको इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में बिना मिटà¥à¤Ÿà¥€ के खेती यानी बिना खेत की खेती करने के इस नठतकनीक से जà¥à¥œà¥€ सà¤à¥€ जरà¥à¤°à¥€ जानकारी देने वाले हैं। हमारा पà¥à¤°à¤®à¥à¤– उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ किसानों को नठतकनीकों की जानकारी देकर उनके कृषि कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को आसान à¤à¤µà¤‚ लाà¤à¤•ारी बनाना है।
यह तकनीक कृषि के पारंपरिक तरीके से पूरी तरह अलग है, जिसमें मिटà¥à¤Ÿà¥€ की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं होती। इसके बजाय, पौधे पानी में मौजूद खनिजों à¤à¤µà¤‚ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ को अवशोषित कर अपना विकास करते हैं। यह तकनीक हाइडà¥à¤°à¥‹à¤ªà¥‹à¤¨à¤¿à¤•à¥à¤¸ à¤à¤µà¤‚ à¤à¤°à¥‹à¤ªà¥‹à¤¨à¤¿à¤•à¥à¤¸ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ पर आधारित है, जिसमें पौधे विकास के लिठसà¤à¥€ आवशà¥à¤¯à¤• पोषक ततà¥à¤µ पानी à¤à¤µà¤‚ हवा के माधà¥à¤¯à¤® से गà¥à¤°à¤¹à¤£ करते हैं। इस पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ में, पौधों को उनकी पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक वृदà¥à¤§à¤¿ के लिठआवशà¥à¤¯à¤• सà¤à¥€ ततà¥à¤µ पानी के माधà¥à¤¯à¤® से दिठजाते हैं, जिससे फसल के सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ विकास के लिठमिटà¥à¤Ÿà¥€ की आवशà¥à¤¯à¤•ता पूरी तरह समापà¥à¤¤ हो जाती है। इस तकनीक के विकास से किसान न केवल अपनी उपज को बढ़ा सकेंगे, बलà¥à¤•ि साथ ही साथ पानी की बचत à¤à¥€ कर सकेंगे। इस पà¥à¤°à¤•ार कहें तो हाइडà¥à¤°à¥‹à¤ªà¥‹à¤¨à¤¿à¤• फारà¥à¤®à¤¿à¤‚ग à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ तकनीक है, जिसमें पौधे मिटà¥à¤Ÿà¥€ के बजाय पानी में उगाठजाते हैं। इसमें à¤à¤• विशेष मिकà¥à¤¸à¤šà¤° के माधà¥à¤¯à¤® से पानी में सà¤à¥€ जरूरी पोषक ततà¥à¤µ दिठजाते हैं। जिससे पौधे को पानी से ही वे सà¤à¥€ पोषक ततà¥à¤µ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो जाते हैं, जो पारंपरिक/पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक तरीकों में मिटà¥à¤Ÿà¥€ से पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करनी होती है। इस पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤¸ में पानी का संचार à¤à¤• नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ तरीके से होता है, जिससे पौधों को उनकी पूरी जरूरत का पोषण मिलता रहता है।
कोई à¤à¥€ कृषि तकनीक तà¤à¥€ कारगर हो सकती है, जब वो उस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ विशेष के जलवायॠके अनà¥à¤•ूल हो। आईआईटी कानपà¥à¤° के SIIC में इनकà¥à¤¯à¥‚बेट किया गये सà¥à¤Ÿà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤…प à¤à¤•à¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤‚थेसिस के अंतरà¥à¤—त हाल ही में हाइडà¥à¤°à¥‹à¤ªà¥‹à¤¨à¤¿à¤• फारà¥à¤®à¤¿à¤‚ग को à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤•ूल बनाने के लिठà¤à¤• नई à¤à¤µà¤‚ यूनिक तकनीक विकसित किया है। इस नई तकनीक से अब कम लागत में केशर, टमाटर, खीरा, सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤¬à¥‡à¤°à¥€, बेल पेपर और हरà¥à¤¬à¥à¤¸ जैसी महंगी फसलों को à¤à¥€ बिना मिटà¥à¤Ÿà¥€ के उगाया जा सकता है। इस तकनीक की महतà¥à¤¤à¤¾ और à¤à¥€ इस लिठबॠजाती है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इन फसलों की मांग बाजार में लगातार बढ़ रही है, लेकिन उस हिसाब से इनका उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ पारंपरिक कृषि पदà¥à¤§à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से संà¤à¤µ नहीं हो पा रहा है। साइंस à¤à¤µà¤‚ टेकà¥à¤¨à¥‹à¤²à¥‰à¤œà¥€ के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में इसे à¤à¤• बड़ी उपलबà¥à¤§à¤¿ के रूप में देखा जा रहा है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह तकनीक ना केवल फसल उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ में आने वाली लागत को कम करती है, बलà¥à¤•ि यह पानी जैसे अनà¥à¤¯ बहà¥à¤®à¥‚लà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक संसाधनों को à¤à¥€ बचाने में सहयोगी साबित हो सकती है।
पानी के माधà¥à¤¯à¤® से पोषक ततà¥à¤µ दिये जाने के तरीके के बेसिस पर हाइडà¥à¤°à¥‹à¤ªà¥‹à¤¨à¤¿à¤•à¥à¤¸ फारà¥à¤®à¤¿à¤‚ग के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार है। आइये जानते हैं, इनके विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ तरीके à¤à¤µà¤‚ उनके लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ फसलों के बारे में:
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हाइडà¥à¤°à¥‹à¤ªà¥‹à¤¨à¤¿à¤•à¥à¤¸ फारà¥à¤®à¤¿à¤‚ग टाइप |
लाठ|
उपयà¥à¤•à¥à¤¤ फसलें |
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विकिंग सिसà¥à¤Ÿà¤® (Wicking System)
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आसान à¤à¤µà¤‚ किफायती सिसà¥à¤Ÿà¤® जो छोटे पौधे के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ |
जड़ी-बूटियां à¤à¤µà¤‚ छोटी पतà¥à¤¤à¥€à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤ |
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डीप वाटर कलà¥à¤šà¤° (DWC) |
पतà¥à¤¤à¥‡-वाली सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठबेसà¥à¤Ÿ, पौधे तेजी से विकास करने में सकà¥à¤·à¤® |
सलाद à¤à¤µà¤‚ पालक जैसे सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ |
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à¤à¤¨à¤à¤«à¤Ÿà¥€ |
कमरà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤² कृषि के लिठबेसà¥à¤Ÿ |
टमाटर, खीरा à¤à¤µà¤‚ पतà¥à¤¤à¥‡à¤µà¤¾à¤²à¥€ सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ |
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डà¥à¤°à¤¿à¤ª सिसà¥à¤Ÿà¤® (Drip System) |
पानी à¤à¤µà¤‚ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ का बेहतर कंटà¥à¤°à¥‹à¤² |
टमाटर à¤à¤µà¤‚ मिरà¥à¤š के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ |
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à¤à¤°à¥‹à¤ªà¥‹à¤¨à¤¿à¤•à¥à¤¸ |
मॉडरà¥à¤¨ तकनीक, पौधे का तेज विकास संà¤à¤µ |
आलू, टमाटर à¤à¤µà¤‚ मिरà¥à¤š के लिठबेसà¥à¤Ÿ |
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कà¥à¤°à¥‡à¤•ी सिसà¥à¤Ÿà¤® |
कम देखà¤à¤¾à¤² की जरà¥à¤°à¤¤ |
लेटà¥à¤¯à¥‚स, पलक à¤à¤µà¤‚ तà¥à¤²à¤¸à¥€ |
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इबà¥à¤¬ à¤à¤‚ड फà¥à¤²à¥‹ (Ebb & Flow) |
जड़ों को बेहतर आकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ मिलता है |
फूल, जड़ी-बूटियों à¤à¤µà¤‚ सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ |
हाइडà¥à¤°à¥‹à¤ªà¥‹à¤¨à¤¿à¤• फारà¥à¤®à¤¿à¤‚ग शà¥à¤°à¥‚ करने में पारंपरिक कृषि पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ से थोड़ी अधिक लागत की जरà¥à¤°à¤¤ होती है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसके लिठआपको à¤à¤• सेट-अप तैयार करने की जरà¥à¤°à¤¤ होती है। लेकिन à¤à¤• बार सेट-अप तैयार हो जाने के बाद फिर आपको आगे चलकर लागत पारंपरिक कृषि से à¤à¥€ कम पड़ती है। अगर आप छोटे पैमाने पर अपने घर में इसके लिठसेट-अप तैयार करवाते हैं, तो आपको 20 से 50 हजार की लागत पड़ सकती है। वहीठअगर बड़े पैमाने पर यानी कमरà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤² लेवल पर लगà¤à¤— à¤à¤• à¤à¤•ड़ में हाइडà¥à¤°à¥‹à¤ªà¥‹à¤¨à¤¿à¤• फ़ारà¥à¤® सेट-अप तैयार करने की लागत 10 लाख से 20 लाख तक आ सकती है। उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय है कि इसमें गà¥à¤°à¥€à¤¨à¤¹à¤¾à¤‰à¤¸ सेटअप, पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ के लिठआवशà¥à¤¯à¤• घोल, जल आपूरà¥à¤¤à¤¿, à¤à¤µà¤‚ बिजली आपूरà¥à¤¤à¤¿ में लगने वाली लागत à¤à¥€ शामिल है।
हाइडà¥à¤°à¥‹à¤ªà¥‹à¤¨à¤¿à¤• फारà¥à¤®à¤¿à¤• तकनीक सामानà¥à¤¯ कृषि पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ से थोड़ी जटिल होती है। आपको कृषि शà¥à¤°à¥‚ करने के पहले इस तकनीक की पूरी जानकारी लेनी आवशà¥à¤¯à¤• है। इसकी जानकारी के लिठआप अपने जिले के कृषि विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ केंदà¥à¤° से संपरà¥à¤• कर उचित टà¥à¤°à¥‡à¤¨à¤¿à¤‚ग पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर सकते है। इसके साथ ही कई à¤à¤¸à¥‡ संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है, जो हाइडà¥à¤°à¥‹à¤ªà¥‹à¤¨à¤¿à¤• फारà¥à¤®à¤¿à¤‚ग की पूरी टà¥à¤°à¥‡à¤¨à¤¿à¤‚ग देने के साथ-साथ सेट-अप तैयार करने में à¤à¥€ आपको गाइड करते हैं। इसके अलावे आपको ऑनलाइन à¤à¥€ इस समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ में जानकारी मिल जाà¤à¤à¤—ी।