मसूर à¤à¤• नकदी फसल है, जिससे किसानों को अचà¥à¤›à¥€ आमदनी पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होती है। यह विशेषकर शाकाहारी लोगों के लिठपोषण का à¤à¤• महतà¥à¤¤à¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है। इसके साथ ही मसूर वायà¥à¤®à¤‚डलीय नाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ को मृदा में सà¥à¤¥à¤¿à¤° करने वाली फसल है, जिससे à¤à¥‚मि की उरà¥à¤µà¤°à¤¤à¤¾ में वृदà¥à¤§à¤¿ होती है।
मसूर ठंढे मौसम के अनà¥à¤•ूल à¤à¤• दलहनी फसल है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में यह à¤à¤• वरà¥à¤·à¤¾ आधारित फसल के रूप उगाई जाने वाली दलहनी फसल है। मसूर की खेती के लिठजो आइडियल तापमान माने जाते हैं, वो 20 से 25°C सेलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¸ है। अधिक वरà¥à¤·à¤¾ या अधिक नमी वाली जलवायॠइसके लिठहानिकारक होती है, अतः शà¥à¤·à¥à¤• à¤à¤µà¤‚ ठंडी जलवायॠसबसे उपयà¥à¤•à¥à¤¤ है। मसूर के फसल का सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ विकास जहाठबà¥à¤†à¤ˆ के समय कम तापमान की मांग करता है, वहीठफसल के परिपकà¥à¤µ होने के लिठसामानà¥à¤¯ गरà¥à¤®à¥€ की मांग करता है।
कृषि à¤à¤µà¤‚ किसान कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ वरà¥à¤· 2024-25 के दौरान मसूर उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ के अगà¥à¤°à¤¿à¤® अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ के आंकड़े जारी किये गठहैं, जिसके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° मसूर का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ 18.17 लाख मीटà¥à¤°à¤¿à¤• टन अनà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ है। यह अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ विशà¥à¤µ में मसूर उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ में पà¥à¤°à¤¥à¤® सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने की ओर à¤à¤¾à¤°à¤¤ का बà¥à¤¤à¤¾ कदम है। वहीठमसूर उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤• पà¥à¤°à¤®à¥à¤– राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶, मधà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶, बिहार, पशà¥à¤šà¤¿à¤® बंगाल, छतà¥à¤¤à¥€à¤¸à¤—ढ़, à¤à¤µà¤‚ à¤à¤¾à¤°à¤–ंड के नाम आते हैं।
मसूर की खेती के लिठदोमट मिटà¥à¤Ÿà¥€ सबसे उपयà¥à¤•à¥à¤¤ होती है। वहीठमिटà¥à¤Ÿà¥€ का pH मान 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिà¤à¥¤ मसूर की फसल की बà¥à¤†à¤ˆ से पूरà¥à¤µ ये धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना चाहिठकि मिटà¥à¤Ÿà¥€ में जल निकासी की अचà¥à¤›à¥€ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ हो।
मसूर के बीज की बà¥à¤†à¤ˆ के पूरà¥à¤µ मिटà¥à¤Ÿà¥€ को उचित तरीके से तैयार कर लेना चाहिà¤à¥¤ मिटà¥à¤Ÿà¥€ की तैयारी के लिठपहली जà¥à¤¤à¤¾à¤ˆ मिटà¥à¤Ÿà¥€ पलटने वाले हल से करनी चाहिà¤à¥¤ इसके बाद 2-3 बार देशी हल या रोटावेटर से जà¥à¤¤à¤¾à¤ˆ करना आवशà¥à¤¯à¤• है ताकि मिटà¥à¤Ÿà¥€ à¤à¥à¤°à¤à¥à¤°à¥€ हो जाठताकि बीज के विकास के उपयà¥à¤•à¥à¤¤ पानी à¤à¤µà¤‚ पोषक ततà¥à¤µ मिल सके। जà¥à¤¤à¤¾à¤ˆ के बाद मिटà¥à¤Ÿà¥€ को समतल à¤à¤µà¤‚ à¤à¥à¤°à¤à¥à¤°à¥€ बना लें ताकि बीज का सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ विकास हो à¤à¤µà¤‚ यह अचà¥à¤›à¥‡ से पोषक ततà¥à¤µ गà¥à¤°à¤¹à¤£ कर सकें।
कृषि वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ों नें नà¤-नठकिसà¥à¤®à¥‹à¤‚ का विकास कर हमेशा से कृषि उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤•ता को बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में अपना अहमॠयोगदान दिया है। मसूर के उनà¥à¤¨à¤¤ बीजों के विकास में à¤à¥€ उनका महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ योगदान है। आइये जानते हैं उन पà¥à¤°à¤®à¥à¤– किसà¥à¤®à¥‹à¤‚ के बारे में जिसे वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ किसान पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— में लाकर बेहतर उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर रहे हैं:
ये किसà¥à¤®à¥‡à¤‚ रोगरोधी, अधिक उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ देने वाली होने के साथ-साथ जलवायॠकी परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ सहनशील होती हैं।
बीज की मातà¥à¤°à¤¾ इस बात पर निरà¥à¤à¤° करती है कि आप इसकी बà¥à¤†à¤ˆ मौसमी यानी समय पर कर रहे हैं या फिर अगेती या पिछेती यानी मसूर के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ सामानà¥à¤¯ मौसम के पहले या बाद में कर रहे हैं। समय से बà¥à¤†à¤ˆ कर रहे हैं तो आपको पà¥à¤°à¤¤à¤¿ हेकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¯à¤° 30 से 40 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® मसूर के बीच की आवशà¥à¤¯à¤•ता होगी, वहीठवहीठपिछेती या अगेती/उतà¥à¤¤à¥‡à¤°à¤¾ बà¥à¤†à¤ˆ के लिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿ हेकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¯à¤° 40 से 50 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® बीज की आवशà¥à¤¯à¤•ता होगी। इसी आधार पर अपने छोटे खेतों के लिठआवशà¥à¤¯à¤• बीजों का à¤à¥€ आप हिसाब लगा सकते हैं।
बीज के सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ अनà¥à¤•à¥à¤°à¤£ à¤à¤µà¤‚ किसी पà¥à¤°à¤•ार के कीटों से बचाव के लिठबà¥à¤†à¤ˆ से पूरà¥à¤µ बीजों का उपचार करना बहà¥à¤¤ ही महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ होता है। 10 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® मसूर के बीज के à¤à¤• पैकेट को 200 गà¥à¤°à¤¾à¤® राजोबियम कलà¥à¤šà¤° से उपचारित करके बोना चाहिà¤à¥¤ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे वैसे खेतों में जहाठपहले कà¤à¥€ à¤à¥€ मसूर की बà¥à¤†à¤ˆ न की गयी हो, उसमें पी.à¤à¤¸.बी. कलà¥à¤šà¤° का उपयोग किया जाना बहà¥à¤¤ जरà¥à¤°à¥€ है।
इसके साथ ही किसान को मसूर के बीजों की बà¥à¤µà¤¾à¤ˆ से पूरà¥à¤µ फफूंदनाशक (थाइरम या कैपà¥à¤Ÿà¤¾à¤¨) 2.5 गà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿ किगà¥à¤°à¤¾ बीज से à¤à¥€ उपचारित कर लेना चाहिà¤à¥¤ इससे बीज à¤à¤µà¤‚ फसल अपना सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ विकास कर पाते हैं, à¤à¤µà¤‚ किसी à¤à¥€ फफूंद वाले रोगों से बचे रहते हैं।
फसल का सही विकास उसको मिलने वाले पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ पर निरà¥à¤à¤° करता है, इसके लिठजरà¥à¤°à¥€ है मिटà¥à¤Ÿà¥€ की जाà¤à¤š (Soil Testing) कर उरà¥à¤µà¤°à¤• के माधà¥à¤¯à¤® से जरà¥à¤°à¥€ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी को पूरा किया जाà¤à¥¤ मसूर की फसल के मामले में उरà¥à¤µà¤°à¤• का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— फसल की बà¥à¤†à¤ˆ के समय पर à¤à¥€ निरà¥à¤à¤° करता है। अगर आप मौसम के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° या समय पर फसल की बà¥à¤†à¤ˆ करने जा रहे हैं, तो पà¥à¤°à¤¤à¤¿ हेकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¯à¤° के हिसाब से आपको 20 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® नाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨, 60 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® फासà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸, 20 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® पोटाश, à¤à¤µà¤‚ 20 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® गंधक का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करना चाहिà¤à¥¤
वहीठयदि उतेरा विधि से बà¥à¤†à¤ˆ यानी समय से पूरà¥à¤µ बà¥à¤†à¤ˆ कर रहे हैं, तो पà¥à¤°à¤¤à¤¿ हेकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¯à¤° के हिसाब से धान की कटाई के बाद 20 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® नाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ का टॉपडà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग करना चाहिà¤à¥¤ तथा 30 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® फासà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸ का फूल आने तक या फलà¥à¤²à¤¿à¤¯à¤¾à¤ बनते समय छिड़काव करना चाहिà¤à¥¤
मसूर की फसल के लिठसिंचाई फूल आने के पूरà¥à¤µ करनी चाहिà¤à¥¤ वहीठधान की खेतों में बोई जाने वाली फसल में यदि वरà¥à¤·à¤¾ ना हà¥à¤¯à¥€ हो तो फली बनने के पूरà¥à¤µ à¤à¤• बार सिंचाई करनी चाहिà¤à¥¤
किसानों का काम फसल की बà¥à¤†à¤ˆ से लेकर कटाई तक जारी रहता है। इसमें खरपतवार का नियंतà¥à¤°à¤£ सबसे महतà¥à¤¤à¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ काम है। यह समय पर इस पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ ना दिया जाठतो मसूर के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ पर इसका बà¥à¤°à¤¾ सर पड़ सकता है। खरपरवार के नियंतà¥à¤°à¤£ के लिठबà¥à¤†à¤ˆ के 20 से 25 दिनों के बाद à¤à¤• बार पूरे खेत की नराई-गà¥à¥œà¤¾à¤ˆ करनी आवशà¥à¤¯à¤• है। इसके साथ ही पà¥à¤°à¤¤à¤¿ हेकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¯à¤° के हिसाब से à¤à¤²à¤¾à¤•à¥à¤²à¥‹à¤° का 3 से 4 लीटर छिडकाव कर देना चाहिà¤à¥¤ या फिर बà¥à¤†à¤ˆ के बाद पेंडीमिथलीन का 3.3 लीटर पà¥à¤°à¤¤à¤¿ हेकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¯à¤° के हिसाब से छिड़काव कर सकते हैं।
अगर बीज शोधित कर अगर बà¥à¤†à¤ˆ की जाठतो मसूर की फसलों में रोग लगने की बहà¥à¤¤ कम संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ होती है। परनà¥à¤¤à¥ फसल के बà¥à¤†à¤ˆ से परिपकà¥à¤µ होने à¤à¤µà¤‚ कटाई तक नजर बनाठरखने की जरà¥à¤°à¤¤ है। यदि किसी पà¥à¤°à¤•ार के रोग का पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• लकà¥à¤·à¤£ दिखे तो तà¥à¤°à¤‚त रोगोपचार किये जाने की आवशà¥à¤¯à¤•ता है। मसूर की फसल में लगने वाले सामानà¥à¤¯ रोग निमà¥à¤¨ हैं:
उकठा à¤à¤µà¤‚ गेरà¥à¤ˆ मसूर में लगने वाली पà¥à¤°à¤®à¥à¤– बीमारी है, इसलिठकिसानों को चाहिठकि इस रोग के पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¥€ पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के बीजों का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें। वहीठबीज मिटà¥à¤Ÿà¥€ से जनित रोगों से मसूर की फसलों को बचाने के लिठकिसान 5 गà¥à¤°à¤¾à¤® टà¥à¤°à¤¾à¤ˆà¤•ोडरà¥à¤®à¤¾ पाउडर पà¥à¤°à¤¤à¤¿ किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® मसूर के बीजों के उपचार के लिठपà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— कर सकते हैं। या फिर इसकी अनà¥à¤ªà¤²à¤¬à¥à¤§à¤¤à¤¾ में थीरम या कारà¥à¤¬à¥‡à¤‚डाजिम का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— पà¥à¤°à¤¤à¤¿ किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® 3 गà¥à¤°à¤¾à¤® मातà¥à¤°à¤¾ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— बीजों के उपचार के लिठकर सकते हैं।
गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ गलन à¤à¤µà¤‚ मूल विगलन जैसे मृदा जनित रोगों के लिठà¤à¥‚मि को उपचारित करना उतना ही आवशà¥à¤¯à¤• है। इसके लिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿ हेकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¯à¤° के हिसाब से वरà¥à¤®à¥€ कमà¥à¤ªà¥‹à¤¸à¥à¤Ÿ या गोबर में 2.5 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® टà¥à¤°à¤¾à¤ˆà¤•ोडरà¥à¤®à¤¾ पाउडर को मिशà¥à¤°à¤¿à¤¤ कर मिटà¥à¤Ÿà¥€ में मिलाकर मृदा का उपचार कर सकते हैं।
इसके साथ ही मसूर की फसलों पर कीटें à¤à¥€ नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाती है। इसमें पà¥à¤°à¤®à¥à¤– रूप से माहू कीट à¤à¤µà¤‚ फली वेधक कीट का पà¥à¤°à¤•ोप होता है। माहू कीट पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ पौधों के अंत वाले कोमल à¤à¤¾à¤—ों से रस चूसकर कà¥à¤·à¤¤à¤¿ पहà¥à¤‚चाता है। इसके उपचार के लिठमिथाइल-ओ-डिमेटान या मोनोकà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¤¾à¤«à¤¾à¤¸ का पानी पानी में घोलकर छिडकाव किया जाना चाहिà¤à¥¤ वहीठफलीवेधक फलियों में छेदकर दानों को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा देते हैं। फलीवेधक के उपचार के लिठवैसिलस थà¥à¤°à¤¿à¤‚जेसिस या फेनवेलरेट का छिडकाव किया जाना चाहिà¤à¥¤
मसूर के फसल के पूरà¥à¤£à¤°à¥‚प से परिपकà¥à¤µ होने पर ही इसकी कटाई करनी चाहिà¤à¥¤ पकने पर इसकी 90% फलियाठसूख जाया करती है। मड़ाई के बाद फसल के à¤à¤£à¥à¤¡à¤¾à¤°à¤£ के दौरान इसमें कीट ना लग जाà¤, इसका à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना जरà¥à¤°à¥€ है। à¤à¤£à¥à¤¡à¤¾à¤°à¤£ के दौरान किसी पà¥à¤°à¤•ार के कीटों से बचाव के लिठअलà¥à¤¯à¥à¤®à¤¿à¤¨à¤¿à¤¯à¤® फासà¥à¤«à¤¾à¤‡à¤¡ की 2 गोली पà¥à¤°à¤¤à¤¿ मैटà¥à¤°à¤¿à¤• टन की दर से डाल देनी चाहिà¤à¥¤
हमनें इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में मसूर की खेती से संबंधित सà¤à¥€ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ जानकारी को समेटने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया है। हमारा उदेशà¥à¤¯ किसानों को जागरूक कर कृषि की उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤•ता बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में अपना सहयोग देना है, ताकि किसानों की आरà¥à¤¥à¤¿à¤• उनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ के साथ-साथ ये देश तरकà¥à¤•ी की राह पर आगे बॠसके। मसूर की खेती à¤à¤• लाà¤à¤•ारी à¤à¤µà¤‚ टिकाऊ कृषि विकलà¥à¤ª है। उपयà¥à¤•à¥à¤¤ बताये गठतकनीक, समय पर बà¥à¤µà¤¾à¤ˆ à¤à¤µà¤‚ कीट-रोग पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन अपनाकर किसान इससे अधिक लाठपà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर सकते हैं।